सोशल मीडिया, खासकर एक्स (पूर्व में ट्विटर), आज के समय में लोगों की भावनाओं, विचारों और पूर्वाग्रहों का एक बड़ा मंच बन चुका है। इस मंच पर हर दिन लाखों लोग अपनी राय व्यक्त करते हैं, लेकिन कई बार यह मंच कुछ समुदायों के खिलाफ नफरत फैलाने का जरिया भी बन जाता है। इनमें से एक समुदाय है बिहार के लोग, जिन्हें "बिहारी" कहकर अक्सर निशाना बनाया जाता है। आखिर ऐसा क्यों है कि बिहारियों को एक्स पर इतनी नफरत का सामना करना पड़ता है? इसके पीछे सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक कारणों का मिश्रण है।
सबसे पहले, बिहार की आर्थिक स्थिति इस नफरत का एक बड़ा कारण है। बिहार लंबे समय से भारत के सबसे गरीब और कम विकसित राज्यों में गिना जाता रहा है। धीमी आर्थिक प्रगति, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के चलते बिहार के लोग रोजगार की तलाश में देश के अन्य हिस्सों में पलायन करते हैं। एक्स पर कई यूजर्स इस पलायन को मजाक का विषय बनाते हैं और बिहारियों को "मजदूर" या "कम पढ़े-लिखे" जैसे विशेषणों से जोड़ते हैं। यह सोच गलत है, क्योंकि बिहारी न केवल मजदूरी करते हैं, बल्कि देश की शीर्ष नौकरशाही और तकनीकी क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाते हैं। फिर भी, एक्स पर स्टीरियोटाइप्स हावी रहते हैं।
दूसरा कारण है सांस्कृतिक और भाषाई अंतर। बिहार मुख्य रूप से हिंदी भाषी क्षेत्र है, और कुछ गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी के प्रति नकारात्मक भावना देखी जाती है। खासकर दक्षिण भारत या महाराष्ट्र जैसे क्षेत्रों से कुछ यूजर्स बिहारियों को "हिंदी थोपने वाला" कहकर तंज कसते हैं। उनकी बोली, उच्चारण और जीवनशैली को लेकर मजाक उड़ाया जाता है। एक्स पर यह नफरत तब और बढ़ जाती है जब कोई बिहारी अपनी भाषा या पहचान का बचाव करता है। यह एक तरह का क्षेत्रीय पूर्वाग्रह है, जो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलता है।
तीसरा, बिहार की राजनीतिक छवि भी इस नफरत को हवा देती है। लालू प्रसाद यादव जैसे नेताओं के कार्यकाल को लेकर बिहार को "गुंडाराज" और "भ्रष्टाचार" से जोड़ा जाता है। हालांकि यह सच है कि बिहार में कुछ समय तक शासन व्यवस्था कमजोर रही, लेकिन एक्स पर लोग इसे पूरे बिहारी समुदाय पर थोप देते हैं। हर बिहारी को एक ही नजरिए से देखा जाता है, जो कि अन्यायपूर्ण है।
चौथा कारण है सोशल मीडिया का स्वभाव। एक्स जैसे मंच पर ट्रोलिंग और मेम्स का चलन है। बिहारियों को निशाना बनाना आसान है, क्योंकि उनके खिलाफ पहले से ही कुछ नकारात्मक धारणाएं मौजूद हैं। एक मजाक से शुरू हुई बात धीरे-धीरे नफरत में बदल जाती है। लोग बिना सोचे-समझे बिहारियों के खिलाफ पोस्ट करते हैं, और यह सिलसिला बढ़ता जाता है।
अंत में, यह कहना गलत नहीं होगा कि बिहारियों को मिलने वाली नफरत उनके अपने कृत्यों से ज्यादा दूसरों के पूर्वाग्रहों का नतीजा है। बिहार ने चाणक्य, बुद्ध और अशोक जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं, और आज भी यह राज्य प्रतिभाओं का केंद्र है। जरूरत है कि एक्स पर लोग स्टीरियोटाइप्स से ऊपर उठें और बिहारियों को उनकी मेहनत और योगदान के लिए सम्मान दें। नफरत फैलाने से बेहतर है कि हम एक-दूसरे को समझें और देश की एकता को मजबूत करें।